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इतिहास

जौन क्षेत्र में महविद्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। चुंकि रजौन भागलपुर जिला अंतर्गत बांका अनुमंडल में आता था और  भागलपुर जिला और बांका की दूरी 47 किलोमीटर थी। बांका अनुमंडल में मात्र एक ही महाविद्यालय था जो छात्र/छात्राओं की बढ्ती संख़्याओं की आवश्यकताओं को पुरा नहीं कर पा रहा था। इस क्षेत्र के कुछ गिने चुने लोगों ने विचार विमर्श के पश्चात् एक आम सभा बुलाई जिसमे सर्व-सम्मति से रजौन मुख्यालय में महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया।

 

महाविद्यालय खोलने से संबंधित बैठक आहूत करने के लिये प्रतिष्टित सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नेता एवं शिक्षाविदों में स्व0 सहदेव प्रसाद सिंह (मोरामा), श्री गणेश प्रसाद सिंह, भूतपूर्व प्रमुख, स्व0 हीरालाल चौधरी, श्री हरि प्रसाद सिंह (मोरामा), स्व0 रामविलाश राय, एडभोकेट (रणयोधा), स्व0 केसवलाल राव, प्रमुख आगे आये।
किसी भी राष्ट्र, प्रांत, दल, संगठन, समाज, व्यक़्ति, साहित्य एवं धर्म का इतिहास होता है- स्थापना वर्ष होता है। आज से 35 वर्ष पूर्व स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के उद्भट विद्वान
डा0 शिवनंदन प्रसाद सिंह  के कर कमलों द्वारा 14.10.1978 को महाविद्यालय की आधारशिला रखी गई थी।

 

स्थापना समिति :

 

शिक्षा ज़िन्दगी की तैयारी नहीं है; शिक्षा खुद ज़िन्दगी है-जॉन डेवे.

 
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